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भृष्टचारी समाज की सुर्ख़ियाँ: “पेपर लीक महोत्सव” का दसवाँ साल: NTA ने फिर चटकाया ताला, सरकार बोली वाह, क्या सिस्टम है!

रात के ढाई बजे हैं। पूरा मोहल्ला सो रहा है, सिर्फ़ राजू के कमरे की ट्यूबलाइट अभी तक जग रही है। उसकी माँ ने क़सम खाई है “जब तक बेटा MBBS में दाख़िल नहीं हो जाता, मैंने बाज़ार से नई चुन्नी तक नहीं लेनी।” उधर राजू का दिमाग़ फिजिक्स के नोट्स में नहीं, उस व्हाट्सएप फ़ॉरवर्ड में अटका है जो सुबह-सुबह आएगा “NEET पेपर 2 लाख में, एडवांस बुकिंग खुली है।” पड़ोस वाले चाचा मुँह बनाकर कहते हैं, “अरे, लीक तो अब हमारी संस्कृति का हिस्सा है, हर साल त्योहार की तरह मनाते हैं।” हँसिए मत, यह व्यंग्य नहीं यह भारत का सबसे सफल साइलेंट स्टार्टअप है, जिसका नाम है “पेपर लीक प्राइवेट लिमिटेड”प्रॉडक्ट डिलीवरी ज़ोमैटो-स्विगी से तेज़, ग्राहक संतुष्टि 100% और सज़ा का रिकॉर्ड? शून्य। पिछले दस साल में 89 बड़े पेपर लीक, 48 रद्द परीक्षाएँ, 6.5 करोड़ बच्चों का करियर हवा में, और सरकारी हीरो NTA का “ज़ीरो एरर” का वादा, जो आख़िरकार “ज़ीरो सज़ा” पर उतरा।

पिछले दस सालों में भारत की परीक्षा प्रणाली जैसे किसी गहरी नींद में हो, और पेपर लीक उसकी आदत बन चुकी हो। हर साल एक नया “लीक महोत्सव” मनाया जाता है, जिसमें न कोई सबक सीखा जाता है, न कोई सजा दी जाती है। नेता जी भाषण देते हैं “युवा हमारा भविष्य है”, पर हकीकत में वे परीक्षा लीक कराने वालों को बिना किसी परिणाम के छोड़ देते हैं। साल 2024 से 2026 के बीच ही 10 से अधिक बड़ी परीक्षाएं लीक हुईं, और 50 लाख से ज्यादा छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया।


लीक का बाजार, सरकारी सिस्टम की मिलीभगत

2024 की शुरुआत ही UP पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा के लीक से हुई, जहां पेपर सिर्फ 50,000 से 2 लाख रुपये में बिक रहा था। नतीजा? 244 गिरफ्तारियां और परीक्षा रद्द, पर सजा केवल उन बच्चो को जिन्होंने ईमानदारी से पेपर दिया। फिर आई NEET UG 2024, जहां बिहार के एक स्कूल में 20 से ज्यादा अभ्यर्थियों को 30-50 लाख रुपये में लीक पेपर और आंसर की बेच दिया गया। CBI ने 50 से ज्यादा लोगों को पकड़ा, लेकिन सजा सुनाने का साहस आज तक नहीं जुटा पाई। क्योंकि अपराधियों के ऊपर नेताओं का हाथ था।

इसके बाद बारी आई JSSC CGL 2024 की, जहां उम्मीदवारों ने OMR शीट खाली छोड़ दी थी—सबूत साफ था कि पेपर लीक हुआ था, पर कमीशन की आंखें सिर्फ बचने का रास्ता खोज रही है। UGC NET 2024 तो डार्कनेट पर बिक गया, और शिक्षा मंत्री ने परीक्षा रद्द करते हुए कहा कि “पवित्रता बनाए रखना जरूरी है।” पर कैसी पवित्रता मंत्री जी जनता को आपकी शिक्षा की पवित्रता नहीं पता। जब सिस्टम ही सड़ चुका है, तो आप परीक्षा करवाके यह उपकार क्यो ?

2025 में UP असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा लीक हो गई, जहां गिरफ्तार लोगों में आयोग का अपना गोपनीय सहायक शामिल था। यानी चूहा घर का था, और बिल्ली सरकारी कुर्सी पर बैठी रही ।


NTA: परीक्षाओं का महारथी या लीक का सौदागर?

NTA परीक्षाएं करवाने के मामले मे इतना कठोर हो चुका है कि कोई भी व्यक्ति पैसे की गड्डी इनके ऊपर फेके यह टूट जाते है। NTA का रिकॉर्ड देखिए—2024 में NEET लीक, 2025 में CUET-UG की तकनीकी गड़बड़ी और प्रश्नपत्र सिलेबस से बाहर, और 2026 में फिर NEET लीक। 3 मई 2026 को हुई परीक्षा का पेपर वायरल हुआ, जिसमें 410 में से 120-130 प्रश्न मिलते थे। NTA ने 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी और कहा, “हमने शून्य त्रुटि का वादा किया था।” जनाब, शून्य त्रुटि नहीं, यह तो ‘शून्य सफलता’ का मामला है! 

राजस्थान के प्रसिद्ध पेपर लीक माफिया जगदीश बिश्नोई के खिलाफ 12 मामले दर्ज हैं, पर वह हर बार जमानत पर बाहर आ जाता है। न तो गैंग खत्म होता है, न सरकारी तंत्र चेता। ThePrint की रिपोर्ट कहती है पेपर लीक अब एक हजारों करोड़ का उद्योग है, जिसमें दोहराने वाले अपराधी और सरकारी मिलीभगत आम बात है। सवाल है की आखिर यह इतना बड़ा उद्योग कैसे बन गया? क्या यह वही पैसे है, जो चुनाव के समय चुनाव प्रचार के लिए काम आते है।


बच्चों की पीड़ा: क्या मेहनत का कोई मोल नहीं?

सोचिए, उस 18-19 साल के छात्र का दर्द जिसने सालों रट्टा लगाया, कोचिंग के लिए मां-बाप ने जमीन तक गिरवी रख दी, और फिर परीक्षा से एक दिन पहले व्हाट्सएप पर पेपर बिकने की खबर आ जाए। परीक्षा केन्द्रों पर बच्चो के ऊपर इतनी सख्ती बर्ती जाती है जिसकी कोई सीमा नहीं। आप को ढीले कपड़े पहनने है, चप्पल पहननी हैे, कपड़ो पर कोई भी धातु ना हो, पानी की बोतल पारदर्शी हो। लड़कियों की स्थिति और भी खराब है, आप चोटी नहीं कर सकती, ब्रा नहीं पहन सकती। बच्चे फिर भी NTA का सहयोग करते है। लेकिन उन्हे फिर भी सड़को पर उतरना पड़ता है, और कहना पड़ता है ,”हमारा एक साल बर्बाद मत करो।” पर सरकार का जवाब? “CBI जांच करेगी। आज CBI की स्थिति यह है कि, उस के ऊपर खुद एक जांच की जरूरत है।

पिछले दस सालों में 89 पेपर लीक के मामले सामने आए, 48 परीक्षाएं रद्द हुईं, 6.5 करोड़ से ज्यादा अभ्यर्थी प्रभावित हुए, लेकिन सजा किसी को नहीं हुई। हां, सरकार ने 2024 में एक करोड़ रुपये जुर्माना और 10 साल जेल का कानून बना दिया, लेकिन The Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक “अब तक कोई दोषसिद्धि नहीं।” मतलब, कानून सिर्फ दिखाने के लिए है, असली काम तो लीक का ही चलता रहेगा। सरकार पुरी कोशिश करती है कि हमारी कोई भी नाकामी लीक ना हो, इसमे यह कामयाब भी हो जाते है, पर पेपर?


आखिरी सवाल: बच्चे अब किस पर भरोसा करें?

अगर यही खेल चलता रहा, तो आने वाले दिनों में छात्रों को परीक्षा से पहले जेल का चक्कर लगाना सामान्य हो जाएगा। NTA, BPSC, UPSC सबके सुरक्षा इंतजाम व्हाट्सएप फॉरवर्ड से कमजोर साबित हो रहे हैं। आज का युवा “कौन सी परीक्षा लीक होगी” इस अटकलबाजी में ज्यादा समय बिताता है, बजाय किताबें पढ़ने के। सरकार की नाकामी का यह आलम है कि अब छात्र भी मान चुके हैं “अगर सिस्टम नहीं सुधरेगा, तो हम भी नहीं सुधरेंगे।” क्या यही वह “विकसित भारत” है, जहां काबिलियत का पैमाना किसी मास्टरमाइंड के व्हाट्सएप मैसेज पर टिका हो?


यह भी ठीक है, आखिर हम “विश्व गुरु” जो है।














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