विकास का पारा : पसीने से लथपथ, मगर आश्वस्त

भारत में “विकास और जलवायु संकट” का असंतुलन बढ़ रहा है।”वृक्षों की कटाई और प्रदूषण” से तापमान में वृद्धि हुई है। समाधान हेतु ‘सौर ऊर्जा और जन-भागीदारी’ अनिवार्य है।

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दिल्ली की सांसों का दशक: जब दिल्ली के विकास ने ‘प्राणवायु’ को भी ‘प्राण लेने वाली’ बना दिया

बीते दस सालों में दिल्ली की हवा ने वह मुकाम हासिल कर लिया है, जिसकी चर्चा अब सिर्फ राष्ट्रीय नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी होती है।

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